सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो के ज़रिए ये दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की हालिया गुजरात रैली में 'मोदी-मोदी' के नारे लगाए गए थे.
वायरल वीडियो में ओबीसी नेता और गुजरात से कांग्रेस पार्टी के विधायक अल्पेश ठाकोर मंच का संचालन करते दिखते हैं.
वीडियो में दिखता है कि ठाकोर मंच से जनता को 'राहुल गांधी ज़िंदाबाद' के नारे लगाने को बोल रहे हैं, लेकिन जवाब में 'मोदी-मोदी' के नारे सुनाई देते हैं.
41 सेकेंड के इस वीडियो को देखकर ऐसा लगता है कि अल्पेश ठाकोर लोगों के इस जवाब से नाराज़ हो जाते हैं और लोगों से चुप होने को कहते हैं.
'अगले 20 साल तक मोदी' जैसे दक्षिणपंथी रुझान वाले कई बड़े फ़ेसबुक पेज हैं जिन्होंने बीते तीन दिनों में इस वीडियो को शेयर किया है और लाखों बार इस वीडियो को देखा जा चुका है.
दो साल पुराने वीडियो से छेड़छाड़
बीबीसी ने पड़ताल में पाया कि ये वीडियो राहुल गांधी की हालिया गुजरात रैली का नहीं, बल्कि दो साल पुराना है.
ये वीडियो गुजरात के गांधीनगर में 23 अक्तूबर 2017 को हुए कांग्रेस पार्टी के 'नवसृजन जनादेश महासम्मेलन' का है.
इस सम्मेलन की फ़ाइल फ़ुटेज देखकर पता चलता है कि कांग्रेस पार्टी के कार्यक्रम के वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है और एडिटिंग की मदद से 'मोदी-मोदी के नारे' वीडियो में जोड़े गए हैं.
कार्यक्रम के असली वीडियो में अल्पेश ठाकोर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी का मंच पर औपचारिक तौर पर स्वागत करने के बाद माइक की ओर बढ़ते हैं.
सम्मेलन के 12वें मिनट में वो मंच से जनता को शांत रहने के लिए कहते हैं. वो कहते हैं कि अल्पेश ठाकोर और राहुल गांधी का सम्मान करते हैं तो भीड़ से कोई आवाज़ नहीं आनी चाहिए.
इसके बाद अल्पेश कहते हैं कि 'दाई ओर से अब भी आवाज़ आ रही है'. लोग उनकी ये अपील सुनकर चुप हो जाते हैं और क़रीब 10 सेकेंड बाद अल्पेश ठाकोर अपना भाषण शुरू करते हैं.
लेकिन कार्यक्रम के असली वीडियो में इस दौरान कहीं भी मोदी-मोदी के नारे सुनाई नहीं देते.
एडिटिंग की मदद से इस वीडियो में न सिर्फ़ 'मोदी-मोदी' के नारे डाले गए हैं, बल्कि कार्यक्रम की तारीख़ और नाम भी हटा दिया गया है.
एक ओर जहां विपक्षी पार्टियां मिलकर बीजेपी को हराना चाहती हैं वहीं कहा ये जा रहा है कि इस मक़सद को हासिल करने में सबसे बड़ी चुनौती ख़ुद कांग्रेस पार्टी ही है.
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती और उनके सहयोगी अखिलेश यादव ने मंगलवार को कांग्रेस पर उत्तर प्रदेश में मतदाताओं के बीच 'भ्रम की स्थिति' फैलाने का आरोप लगाया.
उत्तर प्रदेश में सपा, बसपा और राष्ट्रीय लोकदल ने गठबंधन कर लिया है. ये ऐसा गठबंधन नहीं है जिसे आसानी से तोड़ा जा सके. हालांकि सपा और बसपा उन क्षेत्रों में अपने भरोसेमंद प्रत्याशियों को उतारने में असफल रहे हैं जहां दोनों का अच्छा-ख़ासा वोट बैंक है.
कांग्रेस इस गठबंधन का हिस्सा नहीं है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि ये पूरी तरह से अलग-थलग है. कांग्रेस छोटी पार्टियों के साथ अपने अलग समीकरण बना रही है.
मिसाल के तौर पर देखें तो कांग्रेस की नई महासचिव प्रियंका गांधी ने अभी पिछले हफ़्ते ही भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर को 'करिश्माई नेता' बताया और इसके बाद ये ख़बर आई कि कांग्रेस, सपा और बसपा के पीठ पीछे चंद्रशेखर को वाराणसी से प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ाने की तैयारी करा रही थी.
अब सपा और बसपा पूछ रही हैं कि कांग्रेस को ऐसा करने का अधिकार किसने दिया?
इसके बाद कांग्रेस ने ऐलान किया कि उत्तर प्रदेश में वो लोकसभा की कम से कम सात सीटों पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी, तो मायावती ने इसका तंज़ के साथ स्वागत किया.
"कांग्रेस उत्तर प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने के लिए स्वतंत्र है. हमारा गठबंधन (सपा-बसपा-आरएलडी) बीजेपी को हराने का माद्दा रखता है. कांग्रेस को उत्तर प्रदेश के लोगों में ये भ्रम फैलाना छोड़ देना चाहिए कि वो सात सीटें हमारे गठबंधन के लिए छोड़ रही है."
बसपा देश के दूसरे राज्यों जैसे पंजाब, आंध्र प्रदेश और हरियाणा में भी ग़ैर-बीजेपी, ग़ैर-कांग्रेस दलों के साथ गठबंध की संभावनाएं तलाश रही है.
मायावती ने कहा, "बसपा एक बार फिर ये स्पष्ट करना चाहती है कि हमारा कांग्रेस के साथ न तो उत्तर प्रदेश में और न ही देश के किसी और हिस्से में कोई गठबंधन है. हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं को कांग्रेस द्वारा लगभग रोज़-रोज़ फैलाए जा रहे भ्रमों से बचकर रहना चाहिए."
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी एक ट्वीट में मायावती का समर्थन किया.
उन्होंने लिखा, "एसपी, बीएसपी और आरएलडी मिलकर बीजेपी को उत्तर प्रदेश में हराने में सक्षम हैं. कांग्रेस पार्टी को किसी तरह का भ्रम फैलाने की ज़रूरत नहीं है."
कांग्रेस ने जन-अधिकार पार्टी से गठबंधन करके अपना दल से अलग हुए धड़े के लिए दो सीटें छोड़ने का ऐलान किया है.
पर बात यहीं ख़त्म नहीं होती.
कांग्रेस ने बिहार के लिए भी नई महत्वाकांक्षा सजा ली हैं, जहां राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ख़ुद को सबसे बड़ी पार्टी मानते हुए बीजेपी और जेडीयू को सत्ता में आने से रोकने की बात कर रही है.
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