बीबीसी ने फ़ेक न्यूज़ के फैलाव को समझने के लिए गहन अध्ययन किया है. 110 पेज की इस पूरी रिसर्च को ठीक से समझाने की कोशिश के तहत सवाल-जवाब की शक्ल में हम कुछ जानकारियां आप तक पहुंचाना चाहते हैं. फ़ेक न्यूज़ पर बीबीसी की पूरी रिपोर्ट आप यहां पढ़ सकते हैं और उसे डाउनलोड भी कर सकते हैं.
1. इस शोध के लिए क्या तरीके अपनाए गए हैं?
इस शोध के लिए कई तरीके अपनाए गए जिनमें ये शामिल थे:-
अंग्रेज़ी और दूसरी भारतीय भाषाओं के 47,543 लेखों को देखा गया
ट्विटर के 16 हज़ार अकाउंटों के आपसी रिश्तों का विश्लेषण किया गया
फ़ेसबुक के नेटवर्क का विश्लेषण करने के लिए 3200 एफ़बी पेजों के विज्ञापन के सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया
जो संदेश जमा किए गए उनका सेमियोटिक तरीके से विश्लेषण किया गया
40 लोगों के घरों पर उनका औसतन तीन घंटे लंबा इंटरव्यू किया गया
2.'सैंपल साइज़' सिर्फ़ 40 है. भारत जैसे बड़े और विविधता वाले देश के बारे में हम ऐसे नतीजे कैसे निकाल सकते हैं?
• अगर ये संख्या पर आधारित अध्ययन (जैसे कि सर्वे) होता तो कोई अर्थपूर्ण नतीजा निकालने के लिए 40 का सैंपल साइज़ बहुत छोटा होता, लेकिन ये एक Qualitative (गुणात्मक) अध्ययन है, और इसमें 'ग्राउंडेड थ्योरी' विश्लेषण तकनीक का इस्तेमाल किया गया है.
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• ऐसे गुणात्मक अध्ययन जिनमें ग्राउंडेड तकनीक का इस्तेमाल होता है, उनमें 30 से 50 के बीच के सैंपल साइज़ को बेहतर माना जाता है. इसे समझने के लिए क्लिक करके और पढें. गुणात्मक अध्ययन के लिए सैंपल साइज़ क्या हो, इस पर अकादमियों में होने वाली चर्चा, यहां क्लिक करके पढें.
गौर करने की बात है कि हमने हर व्यक्ति से तीन घंटे की बातचीत दर्ज की. 40 लोगों से तीन घंटे बात करने का मतलब ये है कि हमारे पास 120 घंटे की रिकॉर्डेड जानकारी है, इन 40 लोगों की बातचीत का लिखित विवरण (Transcript) 2000 पेज का है. ऐसे में डाटा वाकई समृद्ध और व्यापक था.
जैसा कि हमने रिसर्च रिपोर्ट में साफ़ तौर पर कहा है, ये प्रोजेक्ट शोध के लिहाज़ से शुरुआती है, हमने ये भी कहा है कि ये रिपोर्ट 'चर्चा की शुरुआत' के तौर पर पेश की गई है, ये आखिरी नतीजा नहीं है. कोई भी अध्ययन आखिरी नतीजा नहीं दे सकता है. अगला क़दम शोध करने वाले दूसरे लोगों को उठाना है जो इस प्रोजेक्ट के कुछ नतीजों को लेकर, दूसरी तमाम तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए इसे आगे बढ़ाएं, इसकी पुष्टि करें, बारीकी से पड़ताल करें या फिर नतीजों को ख़ारिज कर दें.
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